सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज लगातार आगे बढ़ रही है। GJ 3378b और HD 137010 b जैसे ग्रहों के बाद LHS 1140 b भी वैज्ञानिकों के लिए खास लक्ष्य बन गया है। जुलाई 2026 में Science जर्नल में प्रकाशित बताए गए नए शोध ने इस ग्रह के वातावरण को लेकर चर्चा बढ़ाई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, LHS 1140 b ऐसा ग्रह है जिसकी आगे जांच करके यह समझने की कोशिश की जा सकती है कि क्या वहां जीवन के लिए जरूरी परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं।
लेकिन यहां एक फर्क समझना जरूरी है। किसी ग्रह का हैबिटेबल जोन में होना या उसके वातावरण के संकेत मिलना यह साबित नहीं करता कि वहां जीवन मौजूद है या इंसान वहां रह सकते हैं। इसके लिए ग्रह की सतह, वातावरण की संरचना, तापमान और पानी की वास्तविक स्थिति को और अच्छी तरह समझना होगा।
1. LHS 1140 b कहां है और इसका तारा कैसा है?
LHS 1140 b पृथ्वी से करीब 48 प्रकाश-वर्ष दूर है। यह Cetus यानी व्हेल तारामंडल की दिशा में मौजूद है।यह ग्रह LHS 1140 नाम के एक रेड ड्वार्फ यानी लाल बौने तारे की परिक्रमा करता है। रेड ड्वार्फ हमारे सूर्य से छोटे और ठंडे तारे होते हैं। हालांकि ये आकार में छोटे हैं, लेकिन आकाशगंगा में इनकी संख्या बहुत ज्यादा है। इसलिए वैज्ञानिक जीवन की तलाश में इनके आसपास घूमने वाले ग्रहों पर खास नजर रखते हैं। LHS 1140 b के मामले में भी इसका तारा महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रह की कक्षा ऐसी जगह है जहां उसे अपने तारे से जीवन के लिए जरूरी ऊर्जा मिलने की संभावना पर वैज्ञानिक विचार कर सकते हैं।
2. आकार कितना बड़ा है और इसमें पानी कितना हो सकता है?
LHS 1140 b को सुपर-अर्थ कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि यह पृथ्वी की हूबहू दूसरी प्रति है। सुपर-अर्थ आम तौर पर ऐसे ग्रहों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनका द्रव्यमान पृथ्वी से ज्यादा होता है, लेकिन वे गैस दानव जैसे बहुत बड़े ग्रह नहीं होते। LHS 1140 b का आकार पृथ्वी से करीब 1.7 गुना और द्रव्यमान लगभग 5.6 गुना बताया गया है। इसके घनत्व से वैज्ञानिकों को यह अनुमान लगाने का मौका मिलता है कि ग्रह के अंदर पानी की मात्रा पृथ्वी से काफी ज्यादा हो सकती है।
अगर यह अनुमान सही है, तो LHS 1140 b एक दिलचस्प दुनिया बन जाता है। लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। किसी ग्रह में बहुत ज्यादा पानी होने का मतलब यह नहीं कि वहां इंसानों के लिए समुद्र, जमीन और मौसम पृथ्वी जैसे ही होंगे। ग्रह की वास्तविक सतह और पानी की स्थिति जानने के लिए अभी और अवलोकनों की जरूरत है।
3. यह खोज इतनी खास क्यों है?
LHS 1140 b को खास बनाने वाली बात सिर्फ उसका आकार नहीं है। इसकी कक्षा और संभावित वातावरण इसे उन ग्रहों की सूची में लाते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भविष्य में ज्यादा करीब से देखना चाहते हैं। इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं।
हैबिटेबल जोन में मौजूद LHS 1140 b
LHS 1140 b अपने तारे के हैबिटेबल जोन, जिसे आम तौर पर गोल्डीलॉक्स जोन भी कहा जाता है, में स्थित है। यह वह दूरी है जहां किसी ग्रह की सतह पर सही परिस्थितियां होने पर पानी तरल अवस्था में मौजूद रह सकता है।लेकिन हैबिटेबल जोन का मतलब सीधे तौर पर ‘रहने लायक ग्रह’ नहीं है। अगर वातावरण सही नहीं है तो ग्रह बहुत ठंडा या बहुत गर्म हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिक सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि वातावरण और ग्रह की पूरी जलवायु को समझना चाहते हैं।
वायुमंडल के संकेत क्यों महत्वपूर्ण हैं?
LHS 1140 b के वातावरण को लेकर हुई हालिया रिसर्च इस खोज का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। दिए गए शोध के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने ग्रह के ऊपरी वातावरण से गैस के निकलने के संकेत देखे हैं और इसे उसके वातावरण की मौजूदगी से जोड़कर देखा है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी दूर के ग्रह के वातावरण का पता लगाना आसान नहीं होता। वैज्ञानिक अक्सर ग्रह के तारे के सामने से गुजरने के दौरान उसकी रोशनी में होने वाले बेहद छोटे बदलावों को देखते हैं। इससे वातावरण में मौजूद गैसों के बारे में सुराग मिल सकते हैं। अगर LHS 1140 b के पास वास्तव में लंबे समय तक टिकने वाला वातावरण है, तो यह ग्रह की सतह पर स्थिर परिस्थितियां बनने की संभावना को समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, सिर्फ वातावरण की मौजूदगी से यह साबित नहीं होता कि वह इंसानों के लिए सुरक्षित है।
‘Eyeball Earth’ जैसी दुनिया की संभावना
LHS 1140 b के बारे में एक और दिलचस्प संभावना यह है कि यह tidally locked हो सकता है। ऐसी स्थिति में ग्रह का एक ही हिस्सा हमेशा अपने तारे की तरफ रहता है, जबकि दूसरा हिस्सा हमेशा अंधेरे में रहता है। अगर ऐसा LHS 1140 b पर होता है, तो ग्रह का तारे से दूर वाला हिस्सा बेहद ठंडा और बर्फ से ढका हो सकता है। वहीं तारे की ओर वाले हिस्से और अंधेरे हिस्से के बीच एक ऐसा क्षेत्र बन सकता है जहां तापमान अपेक्षाकृत अनुकूल हो। कुछ मॉडलों में ऐसी दुनिया को Eyeball Earth कहा जाता है—जहां अंतरिक्ष से देखने पर बर्फ से घिरे इलाके के बीच तरल पानी का हिस्सा आंख की पुतली जैसा दिखाई दे सकता है। फिलहाल यह एक वैज्ञानिक संभावना है, LHS 1140 b की प्रत्यक्ष तस्वीर नहीं।
4. वैज्ञानिकों के मुताबिक इंसान वहां रह पाएंगे?
यही सबसे बड़ा सवाल है और फिलहाल इसका जवाब नहीं पता। किसी ग्रह को इंसानों के लिए रहने योग्य मानने के लिए सिर्फ तीन चीजें काफी नहीं हैं। वहां पानी, सही तापमान और वातावरण के अलावा विकिरण का स्तर, सतह का दबाव, वातावरण की रासायनिक संरचना और लंबे समय तक स्थिर जलवायु जैसे कई सवालों के जवाब चाहिए। LHS 1140 b का अपने तारे के हैबिटेबल जोन में होना निश्चित रूप से इसे दिलचस्प बनाता है। अगर उसके पास स्थिर वातावरण है और वहां पानी किसी उपयोगी रूप में मौजूद है, तो जीवन की तलाश के लिए इसकी अहमियत और बढ़ सकती है। लेकिन इंसानों के वहां पहुंचने और रहने की बात अभी बहुत दूर है।
48 प्रकाश-वर्ष की दूरी का मतलब है कि आज की तकनीक से वहां मानव मिशन भेजना बेहद कठिन होगा। इसलिए फिलहाल LHS 1140 b पर ‘मानव बस्ती’ की बात करने के बजाय वैज्ञानिकों का असली लक्ष्य इसके वातावरण और सतह को दूर से समझना है।
आगे क्या पता लगाना बाकी है?
अब वैज्ञानिकों को ज्यादा शक्तिशाली स्पेस टेलीस्कोप और लंबे समय तक किए जाने वाले अवलोकनों की जरूरत होगी। अगर भविष्य की जांच में वातावरण की रासायनिक संरचना के बारे में साफ जानकारी मिलती है और पानी से जुड़े मजबूत संकेत भी सामने आते हैं, तो LHS 1140 b जीवन की तलाश के लिए और भी महत्वपूर्ण हो सकता है। सबसे दिलचस्प सवाल यह होगा कि क्या इसके वातावरण में ऐसे रासायनिक संकेत मिलते हैं जिन्हें किसी जैविक गतिविधि से जोड़ा जा सके। फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि LHS 1140 b पर जीवन मौजूद है। इंसानों के रहने का भी कोई प्रमाण नहीं है। फिर भी यह ग्रह वैज्ञानिकों के लिए इसलिए खास है क्योंकि यह हमें एक ऐसे सवाल के करीब ले जाता है, जिसका जवाब खोजने की कोशिश इंसान लंबे समय से कर रहा है—क्या पृथ्वी जैसी परिस्थितियां ब्रह्मांड में कहीं और भी मौजूद हैं?




