लंदन: प्रशांत महासागर में एक बड़ा अल नीनो तैयार हो रहा है। ब्रिटेन के मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह अब तक देखे गए सबसे तेज अल नीनो में से एक हो सकता है। इसके चलते दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का सामान्य पैटर्न बदल सकता है और 2027 के सबसे गर्म साल बनने की संभावना बढ़ सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का असर पहले से ही दुनिया के मौसम पर दिखाई देने लगा है। भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिमी मानसून में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, अटलांटिक में तूफानों की गतिविधि भी कम रही है।
ब्रिटेन के मौसम विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एडम स्काइफ ने इसे असाधारण घटना बताया है। BBC से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी भविष्यवाणियों में अल नीनो का इतना तेज संकेत पहले कभी नहीं देखा।
El Nino क्या है और यह मौसम को कैसे बदलता है?
अल नीनो प्रशांत महासागर और वायुमंडल के बीच होने वाले बड़े बदलावों से जुड़ी मौसम की एक प्राकृतिक घटना है।
सामान्य स्थिति में प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली व्यापारिक हवाएं गर्म सतही पानी को पश्चिम की ओर, यानी एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं। अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उनके सामान्य पैटर्न में बदलाव आता है।
इसका असर समुद्र की सतह के तापमान पर पड़ता है। प्रशांत महासागर का गर्म पानी पूर्व की ओर फैल सकता है और समुद्र से वायुमंडल में ज्यादा गर्मी जाने लगती है।
इसके बाद यह अतिरिक्त गर्मी सिर्फ प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहती। वायुमंडल और महासागर के बीच होने वाले बदलाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, हवाओं और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।
यही वजह है कि वैज्ञानिक अल नीनो को सिर्फ प्रशांत महासागर की घटना नहीं मानते। इसका असर हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस हो सकता है।
प्रशांत महासागर का पानी कितना गर्म हो रहा है?
प्रशांत महासागर के एक अहम इलाके में समुद्र की सतह का तापमान अभी सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल के आखिर में जब अल नीनो अपने चरम पर पहुंच सकता है, तब यह अंतर 3 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो सकता है।
1950 के बाद से उपलब्ध रिकॉर्ड में इतनी तेज गर्मी का संकेत असाधारण माना जा रहा है।
लेकिन वैज्ञानिकों की चिंता सिर्फ समुद्र की सतह तक सीमित नहीं है।
प्रशांत महासागर की गहराई में भी बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा है। कुछ इलाकों में करीब 100 मीटर की गहराई पर पानी का तापमान सामान्य से लगभग 8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा बताया जा रहा है।
इसे समुद्र के भीतर जमा गर्मी के एक बड़े भंडार की तरह देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में यह गर्म पानी सतह के पास आ सकता है और अल नीनो को और मजबूत कर सकता है।
यानी समुद्र के ऊपर दिखाई दे रही गर्मी के पीछे उसकी गहराई में भी काफी ऊर्जा जमा है।
2027 हो सकता है अब तक का सबसे गर्म साल
धरती पहले ही ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन की वजह से पहले से ज्यादा गर्म हो चुकी है। ऐसे में अगर एक मजबूत अल नीनो बनता है, तो वह वैश्विक तापमान को और ऊपर धकेल सकता है।
तेज अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर से बड़ी मात्रा में गर्मी वायुमंडल में पहुंचती है। इसका असर अक्सर उस समय सबसे ज्यादा दिखाई देता है, जब अल नीनो सर्दियों के आसपास अपने चरम पर पहुंच चुका होता है और उसके बाद का साल आता है।
इसी वजह से ब्रिटेन के मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक निक डनस्टोन का कहना है कि 2027 के सबसे गर्म साल बनने की संभावना काफी ज्यादा है।
अगर ऐसा होता है, तो 2027 साल 2024 में बने वैश्विक तापमान के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया के हर हिस्से में तापमान हर दिन असामान्य रूप से बढ़ेगा। अल नीनो का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है। कहीं ज्यादा गर्मी पड़ सकती है, कहीं बारिश के पैटर्न बदल सकते हैं और कहीं सूखे या तूफानों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि प्रशांत महासागर में जमा गर्मी और कमजोर पड़ती व्यापारिक हवाएं मिलकर अल नीनो को कितना मजबूत बनाती हैं।
अगर मौजूदा संकेत सही साबित होते हैं, तो आने वाले महीनों में यह सिर्फ प्रशांत महासागर की कहानी नहीं रहेगी। इसका असर दुनिया के मौसम के उस बड़े सिस्टम पर पड़ सकता है, जिसका संबंध भारत के मानसून से लेकर अलग-अलग देशों की बारिश और तापमान तक है।




