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सींग वाले डायनासोर कैसे लड़ते थे? नई रिसर्च में खुलासा

कल्पना कीजिए, दो विशाल Triceratops आमने-सामने खड़े हैं। अगले ही पल उनके सींग आपस में फंसते हैं और दोनों एक-दूसरे को पीछे धकेलने लगते हैं। वैज्ञानिकों ने अब कंप्यूटर मॉडल से जांचा है कि उनकी खोपड़ी ऐसी लड़ाई का दबाव कैसे सहती थी।

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Edited by: UtkarshPublished: 3 Min read

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दो Triceratops डायनासोर सींग फंसाकर लड़ते हुए, पीछे अन्य सींग वाले डायनासोर
दो Triceratops डायनासोर सींग फंसाकर लड़ते हुए, पीछे अन्य सींग वाले डायनासोर
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Horned Dinosaurs: सींगों से कैसे लड़ते थे डायनासोर?

करीब 6.6 करोड़ साल पहले धरती पर घूमने वाले कुछ डायनासोरों के सिर पर ऐसे सींग थे, जिन्हें देखकर आज भी हैरानी होती है। लेकिन इन सींगों का इस्तेमाल सिर्फ दुश्मनों को डराने के लिए होता था या ये आपस में भिड़ने के असली हथियार भी थे? एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पांच तरह के सींग वाले डायनासोरों की खोपड़ियों के 3D मॉडल बनाकर कंप्यूटर पर जांच की कि लड़ाई के दौरान उनकी हड्डियां किस तरह का दबाव सह सकती थीं। नतीजों से पता चला कि सभी डायनासोर एक ही अंदाज में लड़ने के लिए अनुकूलित नहीं थे। कुछ की खोपड़ी सींगों को आपस में फंसाकर धक्का देने के लिए बेहतर थी, जबकि कुछ की बनावट सामने से किए गए वार को सहने में ज्यादा सक्षम थी।

Horned Dinosaurs की खोपड़ी में क्या खास था?

सींग वाले डायनासोरों के समूह को Ceratopsians कहा जाता है। इनमें मशहूर Triceratops के अलावा Centrosaurus, Protoceratops और Psittacosaurus जैसे डायनासोर भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने जीवाश्म खोपड़ियों के 3D स्कैन से डिजिटल मॉडल तैयार किए। फिर अलग-अलग दिशाओं से लगने वाले बल का simulation किया, ताकि पता चल सके कि लड़ाई के दौरान खोपड़ी के किस हिस्से पर कितना दबाव पड़ता।

हर डायनासोर का लड़ने का तरीका अलग था

Triceratops: इसकी मजबूत खोपड़ी और बड़े सींग आपस में फंसाकर धक्का देने या कुश्ती जैसी लड़ाई के अनुकूल दिखाई दिए।Centrosaurus: इसकी खोपड़ी ऊपर-नीचे की दिशा में लगने वाले बल को अच्छी तरह सह सकती थी। इससे संकेत मिलता है कि यह सामने वाले पर सीधा वार करने में सक्षम रहा होगा। हालांकि, बगल से लगने वाले बल के मामले में इसकी खोपड़ी उतनी मजबूत नहीं दिखी।

Protoceratops: इस छोटे डायनासोर की खोपड़ी सामने से लगने वाले धक्के को अपेक्षाकृत अच्छी तरह सह सकती थी Psittacosaurus: इसके शुरुआती रूप की खोपड़ी अलग-अलग तरह की जोरदार लड़ाई के लिए उतनी अनुकूल नहीं दिखी। इससे यह संभावना बनती है कि इसके सींगरहित पूर्वजों या शुरुआती ceratopsians में लड़ाई की रणनीतियां बाद के बड़े डायनासोरों जैसी नहीं थीं। अध्ययन में Spiclypeus की खोपड़ी भी शामिल थी। उसके परिणामों ने संकेत दिया कि कुछ बाद के ceratopsians कई तरह के मुकाबलों का दबाव सहने के लिए अनुकूलित थे।

क्या सींग सिर्फ लड़ने के लिए विकसित हुए थे?

जरूरी नहीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सींग और सिर के पीछे मौजूद हड्डी की चौड़ी ढाल, जिसे frill कहा जाता है, शुरुआत में साथी को आकर्षित करने, अपनी ताकत दिखाने या दूसरे सदस्यों को पहचानने जैसे सामाजिक कामों में भी उपयोगी रही होगी। समय के साथ इन संरचनाओं का इस्तेमाल आपसी मुकाबलों में भी होने लगा होगा। आधुनिक हिरणों और दूसरे सींग वाले शाकाहारी जानवरों में भी सींग साथी के लिए प्रतिस्पर्धा और प्रभुत्व दिखाने में काम आते हैं।

हालांकि, कंप्यूटर simulation यह नहीं बता सकता कि कोई डायनासोर हर बार वास्तव में कैसे लड़ता था। यह केवल दिखाता है कि उसकी खोपड़ी किन दिशाओं से लगने वाले बल को बेहतर ढंग से सह सकती थी। इस रिसर्च से एक बात साफ होती है: डायनासोरों के सींग केवल दिखावे की संरचनाएं नहीं रहे होंगे। उनकी बनावट और खोपड़ी की मजबूती ने यह तय करने में भूमिका निभाई होगी कि वे मुकाबले में किस तरह अपने हथियारों का इस्तेमाल कर सकते थे।

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