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नकली उल्लू और शिकारी आवाजें पक्षियों को नहीं रोक पाईं

कनाडा में वैज्ञानिकों ने पक्षियों को टर्बाइनों से दूर रखने के लिए नकली उल्लू और शिकारी आवाजें आजमाईं। नतीजों ने इन तरीकों की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए।

Dr. Vikram Sharma
Edited by: UtkarshPublished: 3 Min read

Editorial Review

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कनाडा में पवन टर्बाइनों के पास पक्षियों को दूर रखने के लिए नकली उल्लू और शिकारी आवाजों का परीक्षण किया गया।
पवन टर्बाइन के पास एक नकली उल्लू और उड़ते हुए पक्षी, जो पक्षियों को दूर रखने के उपायों पर हुए अध्ययन को दर्शाते हैं।
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पवन टर्बाइन स्वच्छ ऊर्जा बनाने में मदद करते हैं, लेकिन इनके घूमते ब्लेड पक्षियों के लिए खतरा बन सकते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक ऐसे तरीके खोज रहे हैं, जिनसे पक्षियों को टर्बाइनों के आसपास आने से रोका जा सके। एक कनाडाई अध्ययन में नकली उल्लू और शिकारी जानवरों की आवाजों को आजमाया गया, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

कनाडा में कैसे किया गया प्रयोग?

यह पायलट अध्ययन अगस्त और सितंबर 2016 में कनाडा के नोवा स्कोटिया में किया गया था। शोधकर्ताओं ने हैलिफैक्स से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में मौजूद पांच पवन टर्बाइनों वाले एक विंड फार्म में पक्षियों की गतिविधियों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने पक्षियों को दूर रखने के लिए दो तरह के तरीकों का परीक्षण किया।पहले तरीके में हिलते पंखों वाले नकली उल्लू का इस्तेमाल किया गया। इसे टर्बाइन से लगभग 50 मीटर के दायरे में रखा गया था। दूसरे तरीके में शिकारी पक्षी रेड-टेल्ड हॉक की आवाज के साथ ओवनबर्ड और व्हाइट-थ्रोटेड स्पैरो की चेतावनी वाली आवाजें बजाई गईं। इसके बाद इन तरीकों के दौरान पक्षियों की गतिविधियों की तुलना उन स्थितियों से की गई, जब ऐसे संकेत मौजूद नहीं थे। अध्ययन में घूमते टर्बाइन और स्थिर टर्बाइन वाली नियंत्रण स्थितियां भी शामिल थीं।

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क्या नकली उल्लू से डर गए पक्षी?

शोधकर्ताओं को ऐसा कोई खास असर नहीं मिला, जिससे कहा जा सके कि नकली उल्लू या आवाजों ने पक्षियों को टर्बाइनों वाले इलाके से दूर कर दिया था। यानी सिर्फ किसी शिकारी का मॉडल दिखाना या खतरे जैसी आवाजें बजाना पक्षियों को उस जगह से दूर रखने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ। हालांकि, इस नतीजे का मतलब यह नहीं है कि हर तरह का दृश्य या ध्वनि आधारित उपाय बेकार है। अध्ययन में कुछ खास तरीकों को सीमित परिस्थितियों में परखा गया था। दूसरे डिजाइन, अलग आवाजों या इनके किसी अन्य संयोजन का असर अलग हो सकता है।

पक्षियों की सुरक्षा के लिए क्या मायने हैं?

इस अध्ययन की एक अहम सीमा यह है कि इसमें यह साबित नहीं हुआ कि इन उपायों से टर्बाइनों से पक्षियों के टकराने या उनकी मौत की घटनाओं में कमी आती है। किसी उपाय से पक्षियों की गतिविधियां बदलना और उनकी मौत का खतरा कम होना दो अलग बातें हैं। इसलिए किसी तरीके को प्रभावी मानने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह वास्तव में टकराव और मौतों की संख्या घटाता है या नहीं।

पवन ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने के साथ पक्षियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। इस अध्ययन से संकेत मिलता है कि केवल नकली उल्लू या शिकारी आवाजों पर भरोसा करना सही नहीं होगा। ऐसे उपायों की उपयोगिता जानने के लिए बड़े और लंबे समय तक चलने वाले अध्ययनों की जरूरत है।

Quick Quiz

Question 1 of 1

कनाडा के इस पायलट अध्ययन में पक्षियों को टर्बाइनों से दूर रखने के लिए किस दृश्य उपाय का इस्तेमाल किया गया था?

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Frequently Asked Questions

कनाडा के अध्ययन में क्या जांचा गया था?
शोधकर्ताओं ने जांचा कि नकली उल्लू और शिकारी पक्षियों की आवाजों का इस्तेमाल करके पवन टर्बाइनों के पास पक्षियों की गतिविधियों को कम किया जा सकता है या नहीं।
नकली उल्लू कहां लगाया गया था?
अध्ययन में इस्तेमाल किए गए उल्लू मॉडल को टर्बाइन से लगभग 50 मीटर के दायरे में रखा गया था।
क्या शिकारी पक्षियों की आवाजों से पक्षी दूर चले गए?
अध्ययन में ऐसा कोई खास असर नहीं मिला, जिससे यह कहा जा सके कि इन आवाजों ने पक्षियों को टर्बाइनों वाले इलाके से दूर कर दिया।
क्या इस अध्ययन ने साबित किया कि पक्षियों की मौत कम नहीं हो सकती?
नहीं। अध्ययन ने यह साबित नहीं किया कि इन उपायों से पक्षियों की मौत कम होती है या नहीं। इसके लिए टकराव और मौतों के आंकड़ों की अलग से जांच जरूरी है।

Sources & References

2 Sources

Dr. Vikram Sharma
About the AuthorScience Desk

डॉ. विक्रम शर्मा पिछले 10 वर्षों से अंतरिक्ष (Cosmos), क्वांटम मैकेनिक्स और दुनिया के अनसुलझे रहस्यों (Mysteries) पर रिसर्च और जर्नलिज्म कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य जटिल विज्ञान को बिल्कुल आसान और रोचक हिंदी में लोगों तक पहुँचाना है। डॉ. विक्रम शर्मा पिछले 10 वर्षों से अंतरिक्ष (Cosmos), क्वांटम मैकेनिक्स और दुनिया के अनसुलझे रहस्यों (Mysteries) पर रिसर्च और जर्नलिज्म कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य जटिल विज्ञान को बिल्कुल आसान और रोचक हिंदी में लोगों तक पहुँचाना है।

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