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Starship 14th Test: Orbit, 26 Satellites और पूरी कहानी

पहली बार सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि पृथ्वी की कक्षा में टिकना—Starship के 14वें टेस्ट ने SpaceX के सबसे बड़े रॉकेट की अगली परीक्षा सामने रख दी।

Dr. Vikram Sharma
Updated: 10 Min read

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पृथ्वी की कक्षा में उड़ता SpaceX Starship रॉकेट और उसके पीछे दिखाई देती नीली पृथ्वी
पृथ्वी की कक्षा में उड़ता SpaceX का Starship, जिसके जरिए भारी payload को अंतरिक्ष तक पहुंचाने की नई तकनीक विकसित की जा रही है।
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Starship 14th Test: पहली बार कक्षा में पहुंचा SpaceX का रॉकेट

अगर किसी रॉकेट को सिर्फ अंतरिक्ष की सीमा तक पहुंचना हो, तो वह एक उपलब्धि है। लेकिन उसे इतनी रफ्तार देना कि वह पृथ्वी के चारों ओर लगातार चक्कर लगा सके, एक बिल्कुल अलग स्तर की चुनौती है।

28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, SpaceX के Starship ने अपने 14वें टेस्ट में पहली बार orbital trajectory हासिल की। मिशन के दौरान 26 नए Starlink V3 सैटेलाइट्स को भी कक्षा में तैनात किया गया।

शुरुआती योजना के अनुसार Starship को लगभग 10 घंटे तक पृथ्वी की कक्षा में रहना था। लेकिन मिशन के दौरान मिले डेटा और किए गए रिव्यू के बाद इसे तय समय से पहले वापस लाने का फैसला किया गया। उड़ान के करीब 2 घंटे 12 मिनट बाद deorbit burn पूरा किया गया और मिशन के लगभग तीसरे घंटे में upper stage को प्रशांत महासागर में नियंत्रित तरीके से उतारने की योजना पूरी की गई।

यह उड़ान इसलिए भी खास थी क्योंकि इससे पहले Starship की परीक्षण उड़ानों को orbital velocity हासिल करने के बजाय मुख्य रूप से sub-orbital trajectories तक सीमित रखा गया था।

Starship ने पहली बार Orbit कैसे हासिल की?

Starship को भारतीय समयानुसार 28 सितंबर की शाम करीब 6:16–6:20 बजे लॉन्च किए जाने की जानकारी दी गई है।

इस मिशन में Starship के दो मुख्य हिस्से थे—नीचे का Super Heavy booster और ऊपर का Starship spacecraft।

लॉन्च के लगभग 2 मिनट 30 सेकंड बाद Super Heavy booster अलग हुआ। इसके बाद upper stage यानी Starship spacecraft ने अपनी यात्रा जारी रखी और orbital insertion burn पूरा किया।

यही इस मिशन का सबसे अहम क्षण था।

किसी यान का अंतरिक्ष तक पहुंच जाना और उसका orbit में प्रवेश करना एक ही बात नहीं है। Orbit के लिए यान को इतनी क्षैतिज गति हासिल करनी होती है कि वह पृथ्वी की ओर गिरते हुए भी लगातार पृथ्वी को “miss” करता रहे।

इस मिशन में Starship ने पहली बार इसी orbital flight profile को हासिल करने का प्रयास किया।

इस मिशन की दूसरी बड़ी बात थी 26 Starlink V3 satellites की deployment।

रिपोर्ट के अनुसार, ये नए generation के Starlink satellites थे और Starship की payload-deployment क्षमता को वास्तविक मिशन जैसी परिस्थिति में परखने का मौका मिला।

इन satellites का उद्देश्य Starlink constellation की क्षमता बढ़ाना है। हालांकि, एक satellite की exact data capacity और पूरे मिशन से जुड़ी 26 Tbps क्षमता जैसे आंकड़ों को आधिकारिक तकनीकी दस्तावेज से verify करना जरूरी है; ऐसे आंकड़े satellite configuration और network architecture के अनुसार बदल सकते हैं।

फिर भी तकनीकी दृष्टि से इसका महत्व साफ है—Starship अगर बड़े payload को orbit में नियमित रूप से पहुंचाने में सक्षम होता है, तो भविष्य में बड़े और भारी satellites को deploy करना ज्यादा आसान हो सकता है।

Starship को 10 घंटे की जगह जल्दी वापस क्यों लाया गया?

शुरुआती मिशन योजना लगभग 10 घंटे की orbital flight की थी। लेकिन अंतरिक्ष मिशनों में हर चीज पहले से तय समय के अनुसार ही चले, यह जरूरी नहीं होता।

मिशन के दौरान spacecraft से लगातार telemetry और दूसरे sensor data मिलते रहते हैं। इन्हीं आंकड़ों को देखकर ground controllers यह तय कर सकते हैं कि मिशन को आगे बढ़ाना है या किसी चरण को पहले समाप्त करना ज्यादा उचित होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक इस उड़ान में भी review के बाद mission को जल्दी समाप्त करने का फैसला किया गया।

लगभग 2 घंटे 12 मिनट बाद deorbit burn किया गया। इसके बाद Starship ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश किया और प्रशांत महासागर की ओर controlled descent किया।

Starship की वापसी में सबसे कठिन हिस्सा क्या है?

Orbit में पहुंचना मिशन का आधा हिस्सा है। वहां से वापस आना भी उतनी ही बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है।

जब कोई spacecraft पृथ्वी के वायुमंडल में बहुत तेज गति से प्रवेश करता है, तो उसके सामने की हवा अचानक compress होती है। इससे spacecraft के आसपास अत्यधिक गर्म plasma बन सकता है।

इसीलिए Starship के नीचे हजारों heat-shield tiles लगाए जाते हैं। इनका काम spacecraft के बाहरी हिस्से को re-entry के दौरान पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी से बचाना है।

रिपोर्टों में Starship के heat shield में लगभग 20,000 tiles का उल्लेख किया गया है। हालांकि exact tile count vehicle version और configuration के अनुसार बदल सकता है।

Re-entry के दौरान spacecraft को सिर्फ गर्मी ही नहीं झेलनी पड़ती। उसे aerodynamic forces और लगातार बदलते attitude को भी नियंत्रित करना होता है।

यही कारण है कि orbital flight के बाद controlled return अपने आप में एक बड़ा परीक्षण है।

Orbital और Sub-orbital Trajectory में क्या अंतर है?

यह अंतर समझना Starship के इस मिशन को समझने के लिए बहुत जरूरी है।

Sub-orbital trajectory

Sub-orbital flight में spacecraft अंतरिक्ष की ऊंचाई तक पहुंच सकता है और कुछ समय तक वहां रह भी सकता है, लेकिन उसके पास पृथ्वी की कक्षा में बने रहने के लिए पर्याप्त orbital velocity नहीं होती।

आखिरकार गुरुत्वाकर्षण उसे वापस पृथ्वी की ओर खींच लाता है।

Orbital trajectory

Orbital flight में spacecraft इतनी तेज गति और सही दिशा में चलता है कि वह पृथ्वी के चारों ओर लगातार free-fall में रहता है।

सरल शब्दों में कहें तो spacecraft पृथ्वी की ओर गिरता रहता है, लेकिन उसकी आगे की गति इतनी अधिक होती है कि पृथ्वी की सतह उसकी ओर उतनी ही तेजी से “नीचे” होती जाती है।

यही संतुलन उसे orbit में बनाए रखता है।

Starship आखिर है कितना बड़ा?

Starship को अक्सर एक ही रॉकेट के नाम के रूप में बोला जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से इसका पूरा launch vehicle दो stages से मिलकर बना है।

Super Heavy नीचे का विशाल booster है, जबकि Starship spacecraft ऊपर का reusable spacecraft है।

दोनों मिलकर पूरा Starship launch system बनाते हैं।

आपके दिए गए विवरण के अनुसार इसकी कुल ऊंचाई लगभग 403 फीट, यानी करीब 123 मीटर है। यह इसे दुनिया के सबसे ऊंचे orbital launch vehicles में शामिल करता है।

इसका उद्देश्य केवल पृथ्वी की कक्षा तक satellites पहुंचाना नहीं है। SpaceX की दीर्घकालिक योजना में इसका इस्तेमाल बड़े payloads, चंद्र मिशनों और भविष्य में मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी किया जाना है।

Starship के पिछले टेस्ट: 9वें से 13वें मिशन तक

14वें टेस्ट को समझने के लिए पिछले मिशनों को देखना भी जरूरी है। हर उड़ान में Starship के अलग-अलग हिस्सों को परखा गया और failures से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल अगले vehicle में किया गया।

13वां टेस्ट: पानी में नियंत्रित landing

आपके दिए विवरण के अनुसार Starship का 13वां टेस्ट 25 जुलाई 2026 को हुआ।

इस मिशन में upper stage ने हिंद महासागर में controlled water landing की, जबकि Super Heavy booster ने Gulf of America में landing की।

सबसे दिलचस्प हिस्सा Starship की अंतिम landing sequence थी।

Spacecraft ने पहले belly-flop जैसी aerodynamic स्थिति में atmosphere में प्रवेश किया। इसके बाद उसने खुद को दोबारा vertical orientation में लाने की कोशिश की और पानी की सतह की ओर controlled descent किया।

यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में इसी तरह के maneuver को अलग-अलग landing scenarios में इस्तेमाल किया जा सकता है।

12वां टेस्ट: इंजन समस्या के बावजूद मिशन जारी

रिपोर्ट के मुताबिक 12वें टेस्ट में Starship के एक नए बड़े version को पहली बार उड़ाया गया।

लॉन्च के बाद इंजन से जुड़ी समस्या सामने आई। इसके बावजूद upper stage ने अपनी flight जारी रखी और लगभग एक घंटे बाद हिंद महासागर में controlled water landing पूरी की।

ऐसे परीक्षणों में failure का मतलब हमेशा पूरी तरह बेकार मिशन नहीं होता।

कई बार किसी समस्या के बावजूद spacecraft का बाकी सिस्टम किस तरह प्रतिक्रिया देता है, यह इंजीनियरों के लिए बेहद उपयोगी data देता है।

11वां टेस्ट: Booster और Ship की water landing

14 अक्टूबर 2025 को किए गए 11वें टेस्ट में Super Heavy booster को Gulf of America की ओर और Starship upper stage को हिंद महासागर की ओर controlled water landing profile में भेजा गया था।

इस तरह के परीक्षणों का एक उद्देश्य भविष्य में दोनों stages को ज्यादा नियंत्रित तरीके से वापस लाने की तकनीक विकसित करना है।

10वां टेस्ट: पहली बार आठ simulator satellites

27 अगस्त 2025 को हुए 10वें टेस्ट में Starship ने पहली बार आठ Starlink simulator satellites deploy किए।

ये वास्तविक operational Starlink satellites नहीं थे, बल्कि ऐसे test payloads थे जिनका इस्तेमाल deployment mechanism को जांचने के लिए किया गया।

इससे engineers को यह समझने में मदद मिली कि भविष्य में Starship से बड़ी संख्या में satellites किस तरह deploy की जा सकती हैं।

Upper stage ने इसके बाद हिंद महासागर में controlled water-landing profile को भी पूरा किया।

9वां टेस्ट: Booster बचा, Ship नहीं

28 मई 2025 के 9वें टेस्ट में Starship upper stage ने उड़ान के दौरान control खो दिया और बाद में atmospheric re-entry के दौरान नष्ट हो गया।

इसके बावजूद Super Heavy booster ने अपनी flight का महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा किया और Gulf of America में hard landing की।

यहां फिर वही बात सामने आती है—Starship जैसे experimental launch system में एक उड़ान को केवल “सफल” या “असफल” कहना पूरी तस्वीर नहीं बताता।

एक stage में आई समस्या और दूसरे stage की performance अलग-अलग तकनीकी जानकारी देती है।

Starship का असली लक्ष्य सिर्फ Orbit तक पहुंचना नहीं है

14वें टेस्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि, अगर दिए गए मिशन विवरण की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो केवल यह नहीं होगी कि Starship ने पहली बार orbital trajectory हासिल की।

असल चुनौती इसके बाद शुरू होती है।

एक पूरी तरह reusable launch system को बार-बार उड़ना होगा, payload को सुरक्षित orbit में पहुंचाना होगा, दोनों stages को नियंत्रित तरीके से वापस लाना होगा और फिर कम से कम refurbishment के साथ दोबारा उड़ान भरनी होगी।

अगर Starship इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो इसका असर केवल SpaceX तक सीमित नहीं रहेगा। भारी satellites को orbit में भेजने, बड़े अंतरिक्ष ढांचे बनाने और भविष्य के Moon तथा Mars missions के लिए भी launch architecture बदल सकता है।

लेकिन अंतरिक्ष में किसी एक सफल परीक्षण से यह साबित नहीं होता कि पूरी तकनीक operational रूप से तैयार हो गई है।

असल परीक्षा होगी—क्या Starship इस तरह की उड़ान को बार-बार, सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से दोहरा सकता है?

यही आने वाले मिशनों की सबसे दिलचस्प कहानी होगी।

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Dr. Vikram Sharma
About the AuthorScience Desk

डॉ. विक्रम शर्मा पिछले 10 वर्षों से अंतरिक्ष (Cosmos), क्वांटम मैकेनिक्स और दुनिया के अनसुलझे रहस्यों (Mysteries) पर रिसर्च और जर्नलिज्म कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य जटिल विज्ञान को बिल्कुल आसान और रोचक हिंदी में लोगों तक पहुँचाना है। डॉ. विक्रम शर्मा पिछले 10 वर्षों से अंतरिक्ष (Cosmos), क्वांटम मैकेनिक्स और दुनिया के अनसुलझे रहस्यों (Mysteries) पर रिसर्च और जर्नलिज्म कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य जटिल विज्ञान को बिल्कुल आसान और रोचक हिंदी में लोगों तक पहुँचाना है।

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