Global Glacier Extinction Explorer: कौन सा ग्लेशियर कब तक खत्म होगा?
दुनिया के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। पहाड़ों पर मंडराता यह खतरा अब सिर्फ भविष्य की चेतावनी नहीं रहा। स्विट्जरलैंड से लेकर हिमालय तक कई ग्लेशियर लगातार सिकुड़ रहे हैं और जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखाई देने लगा है। लेकिन सवाल यह है कि आने वाले दशकों में दुनिया के अलग-अलग ग्लेशियर कितने बदल जाएंगे? कौन सा ग्लेशियर कब तक अपना अधिकांश बर्फ खो सकता है? अब वैज्ञानिकों ने इस सवाल को समझने का एक नया तरीका तैयार किया है।
Global Glacier Extinction Explorer क्या है?
Global Glacier Extinction Explorer एक इंटरैक्टिव वेबसाइट है, जिसे ETH Zurich और Vrije Universiteit Brussel के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। इसकी मदद से लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ग्लेशियरों को खोज सकते हैं और यह देख सकते हैं कि Global Warming के अलग-अलग स्तरों का उन पर संभावित असर क्या होगा। यानी यह सिर्फ किसी ग्लेशियर की आज की स्थिति नहीं दिखाती, बल्कि भविष्य में उसके बदलने की संभावित तस्वीर भी सामने रखती है। वेबसाइट पर किसी खास ग्लेशियर को खोजकर यह समझा जा सकता है कि तापमान बढ़ने की अलग-अलग परिस्थितियों में उसकी बर्फ कितनी तेजी से कम हो सकती है और वह भविष्य में किस स्थिति में पहुंच सकता है।
ग्लेशियर का खत्म होना सिर्फ बर्फ का नुकसान नहीं
किसी ग्लेशियर का छोटा होना सिर्फ पहाड़ों का दृश्य बदलने की कहानी नहीं है। ग्लेशियर कई क्षेत्रों में नदियों और पानी के स्रोतों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खासकर हिमालय जैसे इलाकों में लाखों लोगों की पानी की उपलब्धता सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बर्फ और ग्लेशियरों से जुड़ी है। इसलिए ग्लेशियरों का पीछे हटना आने वाले समय में पानी, खेती और पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर डाल सकता है।
खासियत यही है कि यह जलवायु परिवर्तन को सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि एक खास ग्लेशियर के भविष्य के रूप में देखने का मौका देती है। आज जो ग्लेशियर हमें स्थायी दिखाई देते हैं, वे भी हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे—और यह वेबसाइट उस बदलती हुई दुनिया की एक झलक दिखाती है।


